2 मिनट्स नूडल्स के पीछे की कहानी! एक्सपर्ट से जानें आखिर क्यों न खाएं इंस्टेंट नूडल्स

हाल ही में जांच में फेल हुए मैगी के नमूनों की वजह से घर में से तो क्या बाजार में से भी यह अब पूरी तरह गायब हो चुकी है।

एनडीटीवी  |  Updated: June 04, 2019 12:03 IST

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हाल ही में जांच में फेल हुए मैगी के नमूनों की वजह से घर में से तो क्या बाजार में से भी यह अब पूरी तरह गायब हो चुकी है। सिर्फ दो मिनट में बनने वाली मैगी ही नहीं, बल्कि और भी कई तरह के नूडल्स जांच के दायरे में आ गए हैं।

बचपन में छुट्टी के दिन जब हम लोग मम्मी से मैगी खाने के लिए कहते थे, तो वह हमेशा कहा करती थी, 'इसमें मैदा होता है, इसे खाने से बदहजमी की परेशानी होती है।' क्योंकि सभी नूडल्स मैदे से बनाए जाते हैं, इसलिए लोग मानते थे कि एक कटोरी मैदा नूडल्स का मतलब आंतों की परेशानी और मोटापे को बढ़ाना है।

शायद यही सही समय है प्रोसेस्ड फूड के इस्तेमाल पर पूर्णविराम लगाने का, क्योंकि एक साल में पूरी दुनिया में करीब 102.7 बिलियन नूडल्स के पैकेट बिकते हैं।


वर्ल्ड इंस्टेंट नूडल्स एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित खबर के अनुसार, भारत ग्लोबल इंस्टेंट नूडल्स के सेवन करने के मामले में चौथे स्थान पर है। यहां हर साल 5.5 बिलियन पैकेट बेचे जाते हैं। वहीं दूसरी ओर, इस मामाले में चीन पहले नंबर पर है, जहां हर साल 44.4 बिलियन पैकेट बेचे जाते हैं। केवल इन्हीं आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि दो मिनट में बनने वाले नूडल्स का ज़्यादा इस्तेमाल करना आपकी सेहत के लिए कितना हानिकारक हो सकता है।
 







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सेहत के लिए नुकसानदायक

कई सालों से बाजार में मिलने वाले यह नूडल्स घरों में तो बहुत ही आसानी से मिल जाते थे, साथ ही ढ़ाबे और नुक्कड़ पर मौजूद हर दुकान में आसानी से दिख जाते थे, लेकिन यह काफी प्रोसेस्ड फूड है।

इसमें पोषक तत्व तो कम होते ही हैं, साथ ही फैट, सोडियम और कैलोरीज की मात्रा भी अधिक होती है और सिर्फ यही नहीं, इसमें प्रिजर्वेटिव्स, तरह-तरह के बनावटी रंग, स्वाद और योगात्मक चीजें मौजूद होती हैं।

मदन मोहन मालविय हॉस्पिटल, नई दिल्ली में कार्यरत डॉ. सुनील शर्मा के मुताबिक, 'अगर हम मोनोसोडियम ग्लूटामेट और टर्शयरी-ब्यूटाइल हाइड्रोक्विनोन (टी. बी. एच. क्यू) की बात करें, तो यह पेट्रोलियम इंडस्ट्री में उत्पन्न होने वाले ऐसे रसायन हैं, जो शायद इंस्टेंट नूडल्स के स्वाद और कई समय तक बचाकर रखने में मदद करते हैं।'

साउथ कोरियन द्वारा संचालित जांच के मुताबिक, कैसे इंस्टेंट नूडल्स मानव शरीर पर प्रभाव करता है? इस विषय पर पिछले साल, ‘द वॉशिंगटन पोस्ट' ने एक रिपोर्ट निकाली थी। इस पर ह्यून शिन, हावर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और अध्ययन के सह-लेखक ने बताया कि 'इंस्टेंट नूडल्स खाने में आसान और बहुत ही स्वादिष्ट होते हैं, लेकिन इनका सेवन करना मतलब खुद के मैटाबॉलिज्म को खतरे में डालना है। इनमें जहां एक तरफ सोडियम की मात्रा काफी ज़्यादा होती है, वहीं दूसरी ओर इसमें अस्वास्थ्य सैचुरेटिड फैट और ग्लाइसेमिक भार भी अधिक होता है।'



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'द वॉशिंगटन पोस्ट' में प्रकाशित सूचना के मुताबिक, इंस्टेंट नूडल्स कम या बिल्कुल न के बराबर खाने वाली औरतों की तुलना में हफ्ते में एक या दो बार खाने वाली औरतों में काफी फर्क होता है। दोनों के ही शरीर का मैटाबॉलिज्म रेट अलग तरह से काम करता है। बावजूद इसके कि या तो उनका आहार एकदम सादा होता है या फिर वे ज़्यादा फास्ट फूड खाने के वर्ग में आती हैं।

इसके अलावा, नूडल्स को अपने खाने में अधिक इस्तेमाल करना मतलब मोटापा, मैटाबॉलिक बीमारी जैसे डायबटीज, उच्च रक्तचाप और दिल की बीमारियों को बुलावा देना है।

किससे बनी है ये नूडल्स?

कई इंस्टेंट नूडल्स मैदे से बनी होती हैं, जो आटे का चिकना, शुद्ध और फीका रूप होता है। हमारी सेहत के लिए मैदे को क्यों इतना हानिकारक बताया गया है? वह इसलिए क्योंकि यह अत्यधिक परिवर्तित आहार होता है, जो स्वाद में मजेदार तो होता है, लेकिन पोषक तत्वों से खाली होता है।

फॉर्टिस हॉस्पिटल की डॉ. सिमरन सैनी, पेशे से न्यूट्रीशनिस्ट का कहना है, 'मैदे से बने ये इंस्टेंट नूडल्स प्रिजर्वेटिव से भरे होते हैं, जो कि हर तरह के पोषक तत्व से निकली हुई केवल कैलरीज होती है। इनका ज़्यादा इस्तेमाल करना मतलब मोटापे को शरीर में बढ़ाना है। कई स्थिति में तो यह इंस्टेंट नूडल्स हमारी पाचन क्रिया पर भी काफी असर डालते हैं। साथ ही इनके कुछ टुकड़े शरीर के अपेंडिक्स पर प्रभाव डालकर इंफेक्शन के होने का कारण बन सकते हैं।'



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खराब चिकनाई

तरह-तरह के परिवर्तित खाने में फैट जैसे सैचुरेटिड फैट या ट्रांस फैट इतना अच्छा नहीं होता। लेकिन, वहीं मोनोअनसैचुरेटिड फैटी एसिड और पॉलीअनसैचुरेटिड फैटी एसिड आपकी सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं। खाद्य लेबल को अगर गहराई से जाकर देखा जाए, तो इसमें लिखे वेजिटेबल ऑइल, चीनी, चाशनी, स्वाद बढ़ाने वाले कई तरह के पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं।

इंस्टेंट नूडल्स की अगर बात करें, तो इसमें सैचुरेटिड फैट होता है, जिसके इस्तेमाल से खून में कोलेस्टेरॉल की मात्रा बढ़ने के साथ-साथ दिल की बीमारी और टाइप-2 डायबटीज होने के मौके भी अधिक हो जाते हैं।

डॉ. शर्मा का कहना है, 'आपको क्या पता कि कौन-सा तेल आपके परिवर्तित खाने में डाला जा रहा है। खाने योग्य सब्जियों का तेल मतलब कुछ नहीं सिर्फ ताड़ का तेल होता है। इसमें सैचुरेटिड फैट की मात्रा काफी ज़्यादा होती है, जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इंस्टेंट नूडल्स समेत सभी तरह के परिवर्तित आहार में सोडियम, पेट्रोलियम बाय प्रोडक्ट्स, खाद्य योज्य, बुरा कोलेस्ट्ररॉल और सामान्य कार्बोहाइड्रेट की मात्रा काफी अधिक होती है। इसके अलावा इसमें न तो किसी भी तरह का पोषक तत्व होता है और न ही फाइबर होता है। यह सब जान लेने के बाद आप इस खाने को अपने रोज के आहार में कैसे शामिल कर सकते हैं।'

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2013 में स्थानीय अमेरिकन डॉक्टर द्वारा किए गए एक्सपेरिमेंट में उन्होंने यह पता लगाने की कोशिश की कि 'जब हम इंस्टेंट नूडल्स खाते हैं, तो हमारे शरीर में उस दौरान पाचक प्रक्रिया कैसे होती है? एक माइक्रो, गोली के आकार के कैमरे की मदद से उन्होंने नूडल्स के मंथन की प्रक्रिया को कंप्यूटर की स्क्रीन पर देखा। देखने पर पता लगा कि ताजा बनी नूडल्स से करीब एक घंटा ज़्यादा इन इंस्टेंट नूडल्स को पचाने में लगता है।'

एक्सपर्ट का कहना है कि 'परिवर्तित सत्व वाली नूडल्स को खाने के बाद पचाने में पाचनसंबंधी क्रिया को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।'





 
यानी ऊपर लिखी सभी जांच यह साबित कर रही हैं कि किसी भी चीज को अपने खाने में ज़्यादा इस्तेमाल करना मतलब खुद की सेहत को नुकसान पहुंचाना है। सिर्फ इंस्टेंट नूडल्स ही नहीं बल्कि सभी तरह का परिवर्तित आहार भी शरीर के लिए नुकसानदेह है।

डॉ. शर्मा का कहना है, 'आजकल की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि लोगों ने असली खाने की जगह फास्ट फूड ज़्यादा खाना शुरू कर दिया है। जब कि फास्ट फूड समेत हर तरह के परिवर्तित आहार को बहुत ही कम खाना चाहिए, क्योंकि यह आपके असली खाने की जगह कभी नहीं ले सकते।'

संडे को छुट्टी वाले दिन हर कोई आलस में जहां इन दो मिनट में बनने वाली नूडल्स को बनाना पसंद करता है। साथ ही इसे खाकर अपनी भूख मिटाता है, अब यह उनके लिए भी काफी खतरनाक साबित हो सकती है। इसलिए कोशिश करें कि असली खाना ही आपके आहार में शामिल हो।



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