Weight Loss: क्या होती है इमोशनल ईटिंग? खाने का ये तरीका बढ़ा सकता है आपका वजन, जानें खुद पर कैसे करें कंट्रोल

Weight Loss: इमोशनल ईटिंग का आपका वजन बढ़ा  (Weight Gain) सकती है. खाना खाने के सभी का अपना-अपना तरीका होता है. आपका खाना, आपका मूड बता सकता है. अगर आप वजन घटाना (Weight Loss) चाहते हैं तो इमोशनल ईटिंग (Emotional Eating) को छोड़ना काफी जरूरी है.

Avdhesh Painuly  |  Updated: January 06, 2020 12:54 IST

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Emotional Eating: जब आप बिना भूख के खाना खाने लगते हैं तो इसे इमोशनल ईटिंग कहते हैं.

Highlights
  • बिना भूख के खाना आपका वजन बढ़ा सकता है.
  • यहां जानें क्या होती है इमोशनल ईटिंग.
  • वजन घटाने के लिए इमोशनल ईटिंग को कैसे छोड़ें?

Emotional Eating: इमोशनल ईटिंग का आपका वजन बढ़ा  (Weight Gain) सकती है. खाना खाने के सभी का अपना-अपना तरीका होता है. आपका खाना, आपका मूड बता सकता है. लोगों का अच्छे से लेकर खराब मूड आपके खाना (Food) खाने की चाह को भी बयां करता है. अगर आप वजन घटाना (Weight Loss) चाहते हैं तो इमोशनल ईटिंग (Emotional Eating) को छोड़ना काफी जरूरी है. हम अक्सर जब भी खुश होते हैं, कुछ अच्छा खाना चाहते हैं, तो कभी दुखी होने पर खाना खाना ही छोड़ देते हैं. कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो दुखी होने पर या तनाव (Tension) में रहने पर और ज्यादा खाना खाने लगते हैं. इस तरह से अपने इमोशन्स के हिसाब से खाने को इमोशनल ईटिंग भी कहा जाता है. इमोशनल ईटिंग के पीछे का सबसे बड़ा कारण ये है कि खाने के जरिए हम खुद को बेहतर महसूस कराने के लिए खाने का चुनाव करते हैं. भावनात्मक भोजन से न केवल वजन बढ़ सकता है बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हो सकती है. इसके लिए जरूरी है कि आप अपने ऊपर कंट्रोल रखें.

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भूख और इमोशनल इटिंग में फर्क समझें

जब आप बिना भूख के कुछ भी खाने लगते हैं तो यो आपकी भूख के कारण नहीं बल्कि आपके इमोशनल डिमांड्स के कारण हैं. अगर आर अपनी असल भूख और इसके बीच अंतर करना सीख लें तो ये आपके लिए आसान हो सकता है. इसके लिए आपको कुछ नहीं बस अपने खाने के वक्त का ख्याल रखना है. यानी कि लास्ट टाइम आपने कब खाना खाया था और अब आप कब खा रहे हैं. अगर आपने थोड़े देर पहले ही कुछ खाया था और फिर लगातार खा रहे हैं, तो समझ जाएं ये इमोशनल ईटिंग है.



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qc7uehqoEmotional Eating: इमोशनल ईटिंग से बचने के लिए मन को दूसरे कामों में लगाएं

खाना कब और क्या खाएं

हर काम की तरह खाने का भी शेड्यूल होना चाहिए. अगर आप उस शेड्यूल को फॉलो करते हैं, तो आप ओवरईटिंग से बचे रह सकते हैं. ऐसा इसलिए भी क्योंकि अनियमित खाने की आदतें आमतौर पर परेशानी का कारण बनती हैं. कोशिश करें कि जब भी खाने की बात आए अपने डाइट, वजन और शरीर के शेप को याद करें. फिर सोचे कि जो आप खाना चाहते हैं, उसके कितने नुकसान होंगे और इस तरह खुद को खाने से रोकें.



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मन को किसी और काम में लगाएं

मन को किसी काम में लगाए रखना भावनात्मक खाने से बचने के लिए सबसे सरल, सबसे आसान और तरीकों में से एक है. किसी ऐसे काम में मन लगाए जिसमें आपको कोई रिजल्ट निकालना जरूरी हो.



मन को इन तरीकों से करें शांत

कोशिश करें कि स्ट्रेस से बचे रहें. ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच रहें. इस तरह से आप खुद को व्यस्त रख कर आवरईटिंग से बचा सकते हैं. वहीं योग और एक्सरसाइज कर भी खुद को ओवरईटिंग से बचाय रख सकते हैं. यानी कि आप कुछ भी करें पर खुद को खाने से रोकें. 

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