How Much Vitamin D: कितना और क्यों जरूरी है विटामिन डी?

Hypervitaminosis D: विटामिन डी की दवा लेते समय सावधानी बरतनी चाहिए. पहले यह जान लेना चाहिए कि उनके शरीर को अतिरिक्त विटामिन डी लेने की जरूरत है या नहीं.

NDTV Food Hindi  |  Updated: July 02, 2019 12:47 IST

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How Much Vitamin D Is Too Much Vitamin D | How to get vitamin D from sunlight | vitamin d foods

Vitamin D deficiency: विटामिन डी की कमी तेजी से बढ़ रही है.

Highlights
  • विटामिन डी की कमी तेजी से बढ़ रही है.
  • विटामिन डी की अधिकता भी सेहत के लिए अच्छी नहीं.
  • विटामिन डी टॉक्सिटी के भी कई मामले भारत में सामने आए हैं.

How Much Vitamin D Is Too Much Vitamin D : विटामिन डी एक वसा में घुलनशील विटामिन (fat-soluble vitamin) है, जो शरीर के समुचित कार्य के लिए जरूरी है. विटामिन डी (Vitamin D) मांसपेशियों, प्रतिरक्षा प्रणाली और कोशिका वृद्धि के लिए जरूरी है; सूजन को कम करने के अलावा, विटामिन डी रक्तचाप को नियंत्रित (regulate blood pressure) करने में भी मदद करता है और हृदय की रक्षा (protect heart) करने के लिए जाना जाता है. यह कैल्शियम चयापचय (calcium metabolism) में एक प्रमुख भूमिका निभाता है. कैल्शियम को आपको शरीर तभी पचा सकता है जब विटामिन डी हो. विटामिन डी हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन आज की जीवनशैली में विटामिन डी की कमी  (Vitamin D deficiency) बहुत तेज से बढ़ रही है. चिंताजनक बात यह है कि बहुत से लोग किसी चिकित्सक की सलाह के बिना विटामिन डी की दवा (Vitamin D Medicine) लेना शुरू कर देते हैं, लेकिन यह विटामिन डी की दवाई आपके शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकती है. विटामिन डी की दवा लेते समय सावधानी बरतनी चाहिए. पहले यह जान लेना चाहिए कि उनके शरीर को अतिरिक्त विटामिन डी लेने की जरूरत है या नहीं. और अगर है, तो यह समझ लेना चाहिए कि आपको कितने विटामिन डी की जरूरत है. इसके कारण, भारत में हाइपर्विटामिनोसिस डी (Hypervitaminosis D) के कई मामले सामने आ रहे हैं. इसे विटामिन डी विषाक्तता (Vitamin D toxicity) भी कहा जाता है. विटामिन डी की अनुशंसित खुराक (recommended dosage of Vitamin D) के बारे में सही जानकारी की कमी इसकी वजह बनती है.



Vitamin D Deficiency Tips: हाल के अध्ययनों के अनुसार विटामिन डी की अधिकता (overdose of Vitamin D) या ओवरडोज इसकी कमी की तरह ही घातक साबित हो सकती है. इसलिए, यह जरूरी है कि हम स्वस्थ रहने के लिए पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी का उपभोग करें. 



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विटामिन डी पाने के लिए सबसे अच्छा साधन है सूरज की रोशनी. Photo Credit: iStock

क्या है विटामिन डी की कमी (What Is Vitamin D Deficiency?)

<20ng/ml से कम स्तर वाले लोगों में विटामिन डी कमी मानी जाती है. विटामिन डी का स्तर तकरीबन 20 - 39 ng/ml को विटामिन डी की कमी (Vitamin D insufficient) माना जाता है और >30ng/ml तक को स्वस्थ (Vitamin D sufficient).



विटामिन डी की कमी के लक्षण (Symptoms of Vitamin D Deficiency)

- हड्डियों में दर्द होना.

- थकान महसूस करना. 

- बाल झड़ना. 

- हड्ड‍ियों में दर्द और कमजोरी महसूस होना. इसके अलावा शरीर के अलग-अलग हिस्सों की मांसपेशि‍यों में लगातार दर्द भी इसका एक लक्षण है.

- तनाव में रहना भी विटामिन डी की कमी का एक लक्षण हो सकता है. आमतौर पर औरतों में विटामिन डी की कमी से डिप्रेशन या स्ट्रेस की समस्या ज्यादा होती है. 

- चोट भरने में काफी अधिक समय लगना. 

- विटामिन डी की कमी का असर आपके मूड पर होता है. विटामिन डी की कमी का असर सेरोटोनिन हार्मोन पर पड़ता है. जो मूड स्विंग्स की समस्या पैदा करती है.

- विटामिन डी की बहुत ज्यादा कमी होने पर जरा सी चोट लगने पर हड्डी टूटने, खास तौर पर जांघों, पेल्विस और हिप्स में दर्द होता है.

- बहुत ज्यादा नींद आना.

- बार-बार संक्रमण होना.

- पूरे शरीर की तुलना में सिर से ज्यादा पसीना आना.

- मांशपेशियों में कमजोरी.

- थकान और कमजोरी महसूस होना.



विटामिन डी सप्लिमेंट (Vitamin D Supplement)

आज के समय में विटामिन डी की कमी की समस्या काफी ज्यादा आ रही है. एनसीबीआई (NCBI) के मुताबिक दुनियाभर की जनसंख्या का 50 फीसदी विटामिन डी की कमी की समस्या से जूझ रहा है. हर किसी को नियमित रूप से रोज कमस्कम 10 से 20 माइक्रोग्राम विटामिन डी की जरूरत होती है. इसके लिए आप विटामिन डी के सप्लिमेंट ले सकते हैं. यह डॉक्टर से सलाह के बिना नहीं लेने चाहिए. 



विटामिन डी से भरपूर आहार (Foods Rich In Vitamin D)

आप विटामिन डी सीधा सूरज की किरणों से ले सकते हैं. इसके साथ ही साथ आप खाने में विटामिन डी से भरपूर चीजें शामिल कर विटामिन डी की कमी दूर कर सकते हैं. इस बात का ध्यान रखें कि आप विटामिन से भरपूर आहार जरूर लें. यह स्वस्थ जीवन के लिए बहुत जरूरी है. अगर आपको ऊपर बताए गए लक्षणों में से कुछ लक्षण खुद में दिखते हैं तो अपने डॉक्टर से बात जरूर करें.



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फैटी फिश विटामिड डी से भरपूर होती हैं.

फोर्टीफिकेशन (Fortification)

अगस्त 2018 में, एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा और मानक (फोर्टीफिकेशन ऑफ फूड्स) विनियम, 2018 को अधिसूचित किया था. इसके साथ, विटामिन डी के मामले में, भारत फोर्टीफिकेशन की अनुमति देने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया.

सूरज की रोशनी से लें विटामिन डी (Increased Exposure To Natural Sunlight)

यह सुनिश्चित करें कि आप रोज सूरज की रोशनी में बैठें और विटामिन डी लें. सही ब्लड लेवल को बनाए रखने के लिए आपको सप्ताह में कम से कम 10 से 30 मिनट तक सूरज की रोशनी लेनी चाहिए. धूप में बैठने की समयसीमा आपकी त्वचा की संवेदनशीलता पर निर्भर करती है.

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क्या है विटामिन डी टॉक्सिटी (What Is Vitamin D Toxicity?)

150ng/dl से अधिक वाले लोग विटामिन डी टॉक्सिक होते हैं. सही स्तर 20-30ng/ml होता है और सुरक्षित ऊपरी या अधिकतम स्तर 60ng/ml माना जाता है.

विटामिन डी टॉक्सिटी के लक्षण (Symptoms of Vitamin D Toxicity)

विटामिन डी की बहुत ज्यादा खुराक (High dose Vitamin D toxicity) विषाक्तता या रक्त में कैल्शियम के स्तर को बढ़ा सकता है. उच्च कैल्शियम हाइपरलकुरिया यानी गुर्दे की पथरी (hypercalcuria (kidney stones) का कारण बन सकता है.

हाइपरलकसुरिया (Hypercalcuria) तब होती है जब शरीर गुर्दे के माध्यम से अतिरिक्त कैल्शियम से छुटकारा पाने की कोशिश करता है. एक अध्ययन से पता चला है कि छह महीने तक विटामिन डी के 5,000 आईयू लेने वाले नर्सिंग होम निवासियों ने मूत्र में कैल्शियम/क्रिएटिनिन अनुपात में वृद्धि देखी.

अगर शरीर कैल्शियम के स्तर को नियंत्रित नहीं कर पाता है, तो यह खनिज धमनियों और शरीर के कोमल ऊतकों में जमा हो जाता है.



विटामिन डी के लिए सप्लिमेंट लेना कितना सही (Vitamin D Supplements)

विटामिन डी सप्लिमेंट विटामिन डी के स्तर को बढ़ाने का सबसे आसान तरीका है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सप्लिमेंट का आपके शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है? कम विटामिन डी का स्तर एक अंतर्निहित समस्या का लक्षण हो सकता है, लेकिन सप्लिमेंट इसका समाधान नहीं हो सकते. बेहतर होगा कि आप अपने आहार से विटामिन डी की कमी को पूरा करें. इसे लिए आप यह लेख पढ़ सकते है: 

नोट: अपने आहार में किसी भी तरह का बदलाव डॉक्टरी सलाह के बिना न करें.

डॉ. प्रीति राज (पीएचडी)

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