Janmashtami 2019: जानिए जन्माष्टमी का महत्व, शुभ मुहूर्त और भोग के लिए बनाएं क्या खास

जन्माष्टमी हिंदुओं के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है जिसे न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी बहुत उल्लास के साथ मनाया जाता है.

Edited by: Payal  |  Updated: August 22, 2019 11:18 IST

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Janmashtami 2019: Date, Puja Time, Significance And Prasad Prepared The Festival
Highlights
  • इस साल जन्माष्टमी का पर्व 24 अगस्त 2019 को मनाया जाएगा.
  • भगवान कृष्ण का जन्म इसी शुभ दिन हुआ था.
  • इस शुभ अवसर पर कई अलग-अलग प्रकार के भोग तैयार किए जाते हैं.

Janmashtami 2019: जन्माष्टमी हिंदुओं के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है जिसे न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी बहुत उल्लास के साथ मनाया जाता है. पिछले कुछ सप्ताह में ईद, राखी, स्वतंत्रता दिवस से लेकर नवरोज़ जैसे त्योहार मनाए गए और अब भारत जन्माष्टमी का पर्व मनाने की तैयारी कर रहा है. इस साल जन्माष्टमी का पर्व 24 अगस्त 2019 को मनाया जाएगा. ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान कृष्ण का जन्म इसी शुभ दिन हुआ था. जन्माष्टमी में 'जनम' भगवान कृष्ण के राजसी जन्म को संदर्भित करता है, जिन्होंने बड़े होने पर, अपने क्रूर मामा कंस का वध किया और महाभारत के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

जन्माष्टमी 2019 का दिन, पूजा मुहूर्त

जन्माष्टमी 24 अगस्त 2019 को पड़ रही है.
निशिता पूजा का समय - दोपहर 12:01 से दोपहर 12:46 बजे, 25 अगस्त
25 अगस्त 2019 रविवार को दही हांडी
धर्म शास्त्र के अनुसार पराना 
पराना समय - शाम 05:59 बजे के बाद, 25 अगस्त
पराना दिवस पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाते हैं
भारत में कई स्थानों पर, परना निशिता यानी हिंदू मध्यरात्रि के बाद किया जाता है

अष्टमी तिथि शुरू होती है - 08:09 AM 23 अगस्त, 2019 को
अष्टमी तिथि समाप्त हो रही है - 08:24 पूर्वाह्न 24 अगस्त 2019 को
रोहिणी नक्षत्र प्रारम्भ - 03:48 पूर्वाह्न 24 अगस्त 2019 को
रोहिणी नक्षत्र समाप्त - 04:17 पूर्वाह्न 25 अगस्त, 2019

जन्माष्टमी का महत्व

भारत में मानसून असंख्य त्योहारों के साथ जुड़ा हुआ है. अगर इन्ही कहानियों की मानें तो ऐसी ही एक बरसात की रात को कारागार में देवकी और वासुदेव के यहां श्री कृष्ण का जन्म हुआ था. देवकी क्रूर राजा कंस की बहन थी. वासुदेव के साथ देवकी के विवाह के दिन, आकाश से एक भविष्यवाणी हुई. भविष्यवाणी के अनुसार, देवकी और वासुदेव का आठवां पुत्र कंस की मृत्यु का कारण बनने वाला था। यह सुनकर कंस ने देवकी और वासुदेव दोनों को एक कारागार में बंद कर दिया और कंस ने एक-एक करके अपने सभी 7 बच्चों को मार डाला. कृष्ण के जन्म की रात, एक दिव्य आवाज ने वासुदेव को वृंदावन में अपने दोस्त नंद के घर कृष्ण को ले जाने के लिए निर्देशित किया. अपने बच्चे के जीवन की खातिर, उन्होंने सभी तूफानों को पार किया और कृष्ण को अपने सिर के ऊपर वृंदावन ले गए और सुरक्षित रूप से कृष्ण को यशोदा और नंद के पास छोड़ दिया. वासुदेव उसी दिन पैदा हुई अपनी बालिका के साथ राजा कंस के सामने इस उम्मीद में पेश हुआ कि वह उसे इस बात से नुकसान नहीं पहुँचाएगा. मगर निर्दयी कंस बिल्कुल भी दया दिखाने को तैयार नहीं था, उसने छोटी लड़की को एक चट्टान के खिलाफ फेंक दिया. लेकिन इस छोटी लड़की को कोई नुकसान नहीं हुआ, वह रूप धारण कर हवा में उठीं और उसने कंस की मृत्यु के बारे में चेतावनी दी.

भगवान कृष्ण का पालन-पोषण यशोदा ने अपने बेटे की तरह किया. बड़े होने पर, कृष्ण ने कंस को मारने की भविष्यवाणी पूरी की और मथुरा को उसकी सभी क्रूरताओं से छुटकारा दिलाया. कृष्ण के जन्म का जश्न मनाने के लिए कई लोग अपने घर में बाल गोपाल की छोटी मूर्तियों की स्थापना करते हैं. वे मूर्ति को दूध, शहद और पानी से स्नान कराते हैं और मूर्ति को नए और सुंदर कपड़े पहनाते हैं. कुछ लोग जन्माष्टमी के दिन उपवास भी करते हैं और आधी रात को अपना उपवास तोड़ते हैं.

जन्माष्टमी पर बनाएं जाने वाला भोजन और प्रसाद

इस शुभ अवसर पर कई अलग-अलग प्रकार के भोग तैयार किए जाते हैं. भगवान को कई तरह के फल और मीठे पकवान अर्पण किए जाते हैं. क्योंकि छोटे श्रीकृष्ण को मक्खन खाने का बहुत शौक था, इसलिए इस विशेष दिन पर सफेद मक्खन और चीनी को मथकर एक खास भोग माखन मिश्री भी तैयार किया जाता है. कुछ लोग देवता को प्रसन्न करने के लिए इस मौके पर 'छप्पन भोग' भी तैयार करते हैं. एक बार श्रीकृष्ण ने वृंदावन के लोगों को क्रोधित स्वामी इंद्र द्वारा भेजी गई मूसलाधार बारिश से बचाने के लिए अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया. वह आठ दिन तक अपनी छोटी उंगली पर पहाड़ उठाकर खड़े रहे. बारिश थमने के बाद, गांव की महिलाओं ने उनको 56 तरह के विशेष पकवान बनाकर भोग लगाए. वह आठ दिन तक अपनी छोटी उंगली पर पहाड़ उठाकर खड़ा रहा। एक बार बारिश थमने के बाद, गाँव की महिलाओं ने उनके साथ विशेष भोग लगाकर 56 तरह के भोजन किए. छप्पन भोग के कुछ लोकप्रिय घटक हैं माखन मिश्री, खीर, रसगुल्ला, जलेबी, रबड़ी, मठरी, मालपुआ, मोहनभोग, चटनी, मुरब्बा, साग, दही, चावल, दाल, कढ़ी, घेवर, चीला, पापड़, मूंग दाल का हलवा, पकौड़ा, खिचड़ी, बैगन की सब्जी, लौकी की सब्जी, पूरी, बादाम का दूध, टिक्की, काजू, बादाम, पिस्ता, और नमकीन.

Comments

4ncc3rbo

Happy Janmashtami 2019. 
 



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