Type-2 Diabetes: ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करेगी रागी, डायबिटीज में है फायदेमंद

Type-2 diabetes: लो ग्लाइसेमिक आहार ब्लड शुगर लेवल में उछाल नहीं आने देते और टाइप-2 डायबिटीज (Type-2 diabetes) के खतरे को कम करते हैं.

Translated By: Anita Sharma  |  Updated: January 24, 2019 14:30 IST

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Type-2 Diabetes: How Ragi Help Manage Blood Sugar Levels, madhumeh mein ragi ke fayde

Ragi For Diabetes: डायबिटीज इस समय बेहद तेजी से फैल रही है. और दुनिया भर में होने वाली मौतों की बड़ी वजहों में से एक है. हेल्थ एक्सपर्ट और डाइटिशियन की भी यही सलाह रहती है कि डायबिटीज के मरीजों को अपने खान-पान का खास ध्यान रखना चाहिए. डायबिटीज के खतरे को इन आकंडों से भी समझ सकते हैं कि भारत में लगभग 7.2 करोड़ डायबिटीज या मधुमेह (Diabetes) रोगी हैं. आशंका है कि यह संख्या साल 2025 तक 13.4 करोड़ तक पहुंच जाएगी. डायबिटीज या मधुमेह होने वाले लोगों को ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar leve) पर ध्यान देने की जरूरत होती है. इसके साथ ही साथ उन्हें रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) के आवश्यक लेवल को बनाए रखना होता है. एक बात जो हम सबको समझ लेनी चाहिए वह यह कि हम जो भी खाते हैं, जैसा भी खाते हैं वह हमारी सेहत पर सीधा असर करती है. तो अगर आपको डायबिटीज की समस्या है और आप यह जानना चाहते हैं कि आपके लिए क्या खाना सही है और क्या गलत, तो आप सही लेख पढ़ रहे हैं. इस लेख में हम आपको बताएंगे एक ऐसे सुपरफूड के बारे में जो आपके ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने से रोकने में मददगार होगा और डायबिटीज को कंट्रोल (Control diabetes) करेगा.

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यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (United States Department of Agriculture (USDA) के अनुसार डायबिटीक को अपने आहार का तकरीबन 50 फीसदी हिस्सा होलग्रेन यानी अनाज के रूप में लेना चाहिए. क्योंकि होलग्रेन या अनाज फाइबर से भरपूर होते हैं, तो वे ब्लड में अचानक से होने वाले ग्लूकोज एब्जोब्शन को धीमा करते हैं. इन्हें लेने से अचानक ब्लड शुगर लेवल स्पाइकिंग को रोका जा सकता है. कहने का मतलब है कि इनसे ब्लड शुगर लेवल अचानक से नहीं बढ़ता. इसके साथ ही साथ यह लो ग्लाइसेमिक आहार होते हैं जोकि ब्लड शुगर लेवल में उछाल नहीं आने देते और टाइप-2 डायबिटीज (Type-2 diabetes) के खतरे को कम करते हैं. तो अब आप सोच रहे होंगे कि कौन-कौन से होलग्रेन यानी अनाज आपके लिए अच्छे हैं, तो चलिए शुरुआत करते है सबसे बेहतर वाले से. यह है रागी, जिसे इंग्लिश में फिंगर माइलेट्स (Finger millets) कहा जाता है.

Type-2 Diabetes: रागी में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, विटामिन, फाइबर, और कार्बोहाइड्रेट होते है. रागी में कैल्शियम होता है

रागी के फायदे (Ragi Benefits)

रागी अपने आप में एक पोषण से भरपूर आहार है. रागी में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, विटामिन, फाइबर, और कार्बोहाइड्रेट होते है. रागी में कैल्शियम होता है, तो यह आपकी हड्डियों और दांतों को मजबूत करने में भी मददगार है. साथ ही साथ फाइबर से भरपूर रागी आपके पाचन को भी दुरुस्त रखती है. खून की कमी को दूर करने के लिए भी रागी का खूब इस्तेमाल किया जाता है. यह कम हिमोग्लोबिन वाले लोगों के आहार में शामिल करने से इस समस्या को दूर करती है. 

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रागी के फायदे डायबिटीज में (Ragi For Diabetes)

रागी अपने आप में एक पूर्ण पोषक आहार है. भारतीय पारंपरिक आहार में रागी का विशेष महत्व है. उत्तर भारत में जहां सबसे ज्यादा चावलों का इस्तेमाल होता है, वहां रागी की भी अपनी अलग जगह है. लेकिन दक्षिण भारतीय आहार (खासकर कर्नाटका) में इसे बहुत ही अधिक इस्तेमाल किया जाता है. यहां आपको रागी आज भी आहार में मुख्य सामग्री के तौर पर दिख जाएगी. रागी की सबसे अच्छी बात यह है कि यह कार्बोहाड्रेट्स का अच्छा सोर्स है, और क्योंकि यह पॉलिश करने या प्रोसेस्ड करने के लिहाज से बहुत छोटी है तो यह ज्यादातर शुद्ध रूप में मिलती है. रागी में पॉलिफेनॉल्स, कैल्शियम और एसेंशियल एमीनो एसिड होते हैं. डायबिटीज रोगियों को रागी खाने की सलाह दी जाती है. यह उनके लिए सफेद चावलों का अच्छा विकल्प हो सकता है. यह ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में भी मददगार हो सकता है. 


नोट: अपने आहार में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें.

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