
लंदन:
वैज्ञानिकों ने दुनिया भर में व्याप्त फ्लू से लड़ने वाले नए टीके का विकास किया है, जो हमें अधिकतर ज्ञात वायरसों से बचाएगा और भविष्य में फैलने वाली महामारी को रोकने में मदद करेगा। अनुसंधानकर्ताओं ने दो वैश्विक टीके तैयार किए हैं। इस टीके की एक खुराक से विश्व भर में व्याप्त 88 प्रतिशत ज्ञात फ्लू से निजात मिल सकती है। अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि अन्य टीके से 95 प्रतिशत ज्ञात अमेरिकी इंफ्लुएंजा से राहत मिल सकती है।
ब्रिटेन के लैंकेस्टर विश्वविद्यालय के डेरेक गैदरर ने बताया कि “प्रति वर्ष हम लोग फ्लू का टीका तैयार करते हैं, जहां हम लोग हालिया प्रकार के फ्लू का चुनाव टीके के रूप में करते हैं, इस आशा के साथ कि यह अगले वर्ष के फ्लू से बचाएगा। हम जानते हैं कि यह सुरक्षित तरीका है और अधिकतर मौकों पर यह बहुत अच्छे तरीके से काम करता है”।
गैदरर ने कहा कि “हालांकि, कुछ मौकों पर यह काम नहीं करता, जैसे कि वर्ष 2014-15 की सर्दी में एच3एन2 टीका कामयाब नहीं रहा था। अगर यह काम करता भी है, तो बहुत महंगा होता है और इसमें बहुत अधिक मेहनत निहित होती है। साथ ही ये वाषिर्क टीके हमें भविष्य के महामारी वाले फ्लू से बचाने में सक्षम नहीं होते”।
विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के अनुसार विश्व भर में हर साल फ्लू से फैलने वाली महामारी से करीब पांच लाख लोगों की मौत हो जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए फ्लू के वायरस और मानव की रोग प्रतिरोध क्षमता के बारे में हमारी जानकारी के जरिए हम लोग कंप्यूटर की मदद से टीकों के तत्वों का विकास कर सकते हैं, जिससे अधिक प्रभावी टीके का विकास किया जा सकता है। इस अध्ययन का प्रकाशन बायोइनफॉरमेटिक्स जरनल में प्रकाशित किया गया है।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
ब्रिटेन के लैंकेस्टर विश्वविद्यालय के डेरेक गैदरर ने बताया कि “प्रति वर्ष हम लोग फ्लू का टीका तैयार करते हैं, जहां हम लोग हालिया प्रकार के फ्लू का चुनाव टीके के रूप में करते हैं, इस आशा के साथ कि यह अगले वर्ष के फ्लू से बचाएगा। हम जानते हैं कि यह सुरक्षित तरीका है और अधिकतर मौकों पर यह बहुत अच्छे तरीके से काम करता है”।
गैदरर ने कहा कि “हालांकि, कुछ मौकों पर यह काम नहीं करता, जैसे कि वर्ष 2014-15 की सर्दी में एच3एन2 टीका कामयाब नहीं रहा था। अगर यह काम करता भी है, तो बहुत महंगा होता है और इसमें बहुत अधिक मेहनत निहित होती है। साथ ही ये वाषिर्क टीके हमें भविष्य के महामारी वाले फ्लू से बचाने में सक्षम नहीं होते”।
विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के अनुसार विश्व भर में हर साल फ्लू से फैलने वाली महामारी से करीब पांच लाख लोगों की मौत हो जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए फ्लू के वायरस और मानव की रोग प्रतिरोध क्षमता के बारे में हमारी जानकारी के जरिए हम लोग कंप्यूटर की मदद से टीकों के तत्वों का विकास कर सकते हैं, जिससे अधिक प्रभावी टीके का विकास किया जा सकता है। इस अध्ययन का प्रकाशन बायोइनफॉरमेटिक्स जरनल में प्रकाशित किया गया है।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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