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This Article is From Jul 22, 2015

जांच में पाए गए करीब 12 हजार नमूने मिलावटी और गलत ब्रांड वाले

एफएसएसएआई द्वारा जांच किए गए खाद्य पदार्थों के 60,548 सैंपल में से 12,077 सैंपल मिलावट वाले और गलत ब्रांड के पाए गए.

जांच में पाए गए करीब 12 हजार नमूने मिलावटी और गलत ब्रांड वाले
नई दिल्ली:

सरकार ने हाल ही में कहा कि साल 2014-15 में खाद्य सुरक्षा नियामक एफएसएसएआई द्वारा जांच किए गए खाद्य पदार्थों के 60,548 सैंपल में से 12,077 सैंपल मिलावट वाले और गलत ब्रांड के पाए गए।  केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने लिखित जवाब में राज्यसभा को बताया कि इस मामले में कार्रवाई करते हुए अथॉरिटी ने 1,989 आपराधिक और 7,241 अन्य केस दर्ज किए।

 

 

 

फेमस स्नैक्स मैगी नूडल में लेड और एमएसजी (मोनोसोडियम ग्लूटामेट) की मौजूदगी का पता लगने के बाद उठे विवाद पर मंत्री ने कहा कि, “ एफएसएसएआई ने एक आदेश जारी कर नेस्ले इंडिया को कहा है कि वह बाजार से अपने उत्पाद वापस मंगा लें। उन्होंने कहा कि, कंपनी को 15 दिन का समय देते हुए उससे पूछा गया है कि मैगी नूडल्स के नौ संस्करणों के संदर्भ में दी गई मंजूरियों को क्यों नहीं वापस लिया जाना चाहिए”।

पासवान ने कहा कि एफएसएसएआई मैगी विवाद की जांच कर रहा है क्योंकि उसके उत्पाद के खिलाफ शिकायतें मिली थीं। उन्होंने आगे कहा कि, “ अगर एफएसएसएआई को किसी उत्पाद की शिकायत मिलती है, तो उसकी जांच करनी होगी। इसका मतलब यह नहीं कि कंपनी ही बुरी है या अच्छी है।' उन्होंने कहा कि अगर एफएसएसएआई कड़ी कार्रवाई करता है तो उसकी आलोचना होती है और अगर वह बाजार में खराब गुणवत्ता वाले उत्पादों की ब्रिकी रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाता है तो भी उसकी निंदा होती है।

 


 

पासवान ने कहा कि, "हमारी प्राथमिकता उपभोक्ता स्वास्थ्य है। हम नहीं चाहते कि लोगों को खराब गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थ खाने के बाद डॉक्टरों के चक्कर काटने पड़ें। मैगी विवाद के बाद देश में खाद्य सुरक्षा को लेकर लोग जागरुक हो गए हैं।' एफएसएसएआई को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से कंस्यूमर विभाग में शिफ्ट किए जाने की मांग पर उन्होंने कहा,‘ एफएसएसएआई एक स्वतंत्र संस्था है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन आए या उपभोक्ता मामले के मंत्रालय के। सरकार की मुख्य चिंता यह है कि एफएसएसएआई खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करे।"

 

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